ये बात शायद एक महीने पुरानी है, उस रोज़ बस में अपने घर लौट रही थी। हाथ में सब्ज़ी का थैला और दफ़्तर ले जाने वाला बैग कंधों पर था। पीछे के गेट से चढ़ते ही बस चल दी और मेरा संतुलन बिगड़ने ही वाला था कि थैला नीचे रख कोई सीट को पकड़ कर खुद को गिरने से बचाया। आख़री लाइन में एक सीट खाली थी जिसके दाहिने ओर किसी कॉलेज का लड़का अपना फोन इस्तेमाल कर रहा था। और मेरे बाएं ओर दूसरे लड़के बैठे थे जो कि एक-दूसरे से अपनी दिनचर्या बांट रहे थे। उस कॉलेज स्टूडेंट ने मुझसे कहा यदि आप असहज हैं वहां बैठने में तो मुझसे अपनी जगह बदल सकती हैं (क्योंकि उसके दूसरी ओर खिड़की थी)। मैंने ना कहते हुए उसे पूछने के लिए शुक्रिया कहा। वो फिर अपने फोन में लग गया। कुछ देर बाद उसने मुझे एक पंजाबी गाने के बारे में बताया और कहा ये अच्छा है इसे सुनना आप। मैंने ठीक है में जवाब दिया। फिर गीत संगीत पर हमने थोड़ी बातचीत की। बाद में उसने मुझे बस ट्रैकिंग की किसी एप के बारे में भी समझाया, जिस बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। इसके बाद कुछ देर का मौन दोनो ओर से, फिर उसने अचानक एक अमूमन सा सवाल मुझसे पूछा, जिसका जवाब देने भर में मैं सोच में पड़ गई।
सवाल था "कैसा रहा आज का दिन?" मैंने कुछ पल रूक कर जवाब दिया "ठीक था, आपका?"। उसने भी यही कहा। उस रोज़ सच कहूं तो दिन ज़रा भी ठीक नहीं था, पर इस सवाल के बाद अच्छा हो गया था। शायद इसलिए क्योंकि शायद मैं, किसी के द्वारा मेरा दिन पूछे जाने कि जरूरत महसूस कर रही थी। कभी-कभी यह ज़रूरी नहीं होता कि हर वह व्यक्ति जो बिना आपका परिचय जाने आपसे हाल पूछे, वह किसी संदेहपूर्ण मंशा से आपकी ओर आकर्षित हुआ हो। हो सकता है वह बस इस अंजान से शहर में आपकी दिनचर्या पूछ, बिना नाम जाने ही आपको जानना चाहता हो। खैर, फिर हमारा स्टॉप आ गया। मैं दाहिने मुड़ी और मेरे दाहिने बैठा वो लड़का फिर बाईं ओर मुड़ चल दिया। आपको बता दूं हर वह व्यक्ति जो आपसे आपका दिन पूछे या बस ज़रा-सी बात करले वो हमेशा आपके पीछे नहीं आना चाहता, हो सकता है वह इस भीड़ भरी दुनिया में आपका सहयात्री बन आपकी यात्रा सुखद और दिन को यादगार बनाने आया हो। हो सके तो तुम भी किसी की यात्रा यादगार बना देना बिना किसी द्वेष भावना के। अच्छा एक आखरी बात ये भी कि इस यात्रा के दौरान ना उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और ना मैंने.. सिवाय उस एक सवाल-जवाब के, मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानती.. ये यात्रा लगभग एक महीने पुरानी है और मुझे याद है और आगे भी याद रहेगी..❤️
~ऐश्वर्या शर्मा 'आईना'
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आखिर कितने बरस लगते हैं
एक बरस से बाहर आने में..??
कोसों दूर फैले सन्नाटे में
जब एक तेज़ तर्रार ध्वनि
कानों में सन्न से प्रवेश करती है,
फिर अतीत के जाले रह रह कर
और चमकने लगते हैं।
ये ध्वनि हो सकती है बरसों बाद
टेलीफोन पर सुनी किसी की आवाज़,
घर की देहली पर आवाज़ देता
कोई पुराना मित्र या
किसी अंजान शहर में
हाल पूछता कोई रिश्तेदार..!!
मैं इन दिनों इस बात से हैरान हूं कि
बीते बरस से कुछ लोग ही साथ आ पाए हैं।
कुछ से मैंने स्वयं विदा ली थी
और कुछ ने मुझे अपने हिस्से की
विदा दिए बिना चुपचाप ही
अपना घेराव मेरे आस-पास से हटा लिया।
खैर.. संबंध बनते मिटते रहते हैं,
अंततः साथ वही रहते हैं
जो वास्तव में आपके लिए होते हैं।❤️
~ऐश्वर्या शर्मा 'आईना'
तस्वीर बीते बरस की है।🥀
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अपनी किताब "जाना ज़रूरी है क्या!"
की एक कविता "तुम्हारे नाम का कोना"
को इस तरह नए रूप में आपके सामने
लाने के लिए AI की मदद ली है।
बहुत अच्छा नहीं है
फिर भी मेरे लिए कुछ अलग था ये।
हालांकि AI से ये सब करने में
वो बात नहीं है, क्योंकि
कुछ बनाने की उत्सुकता,
बन जाने की प्रक्रिया की आपाधापी,
ना बन पाने की खीझ, और
बन जाने के बाद की खुशी जैसा
कुछ नहीं है इसमें।
हो सकता है बाद में कभी ज़रूर
मेरी रचनाओं को कहीं आकर देने में
AI की बस थोड़ी मदद लगे
वो भी सिर्फ उसे पेश करने के रूप में।
बाकी तो मैं यही चाहती हूं कि
कला मुझ में ज़िंदगी भर ज़िंदा रहे,
ना की केवल नाम भर की रहे
और ना ही AI के ढाँचे में कहीं छिप जाए।🌻
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Lyrics credit - Aishwarya Sharma
Composition - AI
Video image credit - AI
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किताब- जाना ज़रूरी है क्या!
कविता- तुम्हारे नाम का कोना
लेखिका- ऐश्वर्या शर्मा
प्रकाशन- पंक्ति प्रकाशन ❤️
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मैं लिखूंगी झीलें जब भी
तुम अपनी आँखें समझना,
मैं लिखूं कोमल पुष्प कहीं
तुम अपनी हथेलियां छूना,
मैं लिख बैठूं सावन जब भी
तुम अपने आसूं समझना,
मैं लिखूं जब फूलों का खिलना
तुम उसमें अपनी हंसी सुनना,
मैं अनंत आकाश लिखूं जब
तुम मुझ पर अपना संरक्षण मानना,
मैं जगह को जब समंदर लिखूं
तुम उसे अपना शहर सोचना,
मैं अधूरी छोड़ू कविता जहां
तुम मिल कर उसे पूरी करना,
और जब भी लिखूं प्रेम कहीं
तुम खुद को वहां सामने पाना।🦋
~ऐश्वर्या शर्मा 'आईना'
(एक अधूरा मगर मेरी नज़र में ज़रूरी विवरण..🌻🧡)
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कुछ लड़कियाँ दे जाती हैं, कई सीख
हम सी ना बने कभी बची हुई लड़कियाँ,
कुछ लड़कियाँ सीखती और चाहती हैं
बने निडर, अब सभी डरी हुई लड़कियाँ।🌻
किताब- जाना ज़रूरी है क्या!
लेखिका- ऐश्वर्या शर्मा
प्रकाशन- पंक्ति प्रकाशन ❤️
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दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के दौरान दैनिक जागरण की कवरेज में @hindipanktiyaan.official की स्टॉल पर मेरी तस्वीर और मेरी किताब "जाना ज़रूरी है क्या!" का उल्लेख।
शब्दों की यह छोटी-सी यात्रा, अख़बार के पन्नों तक पहुँची.. आभार।🙏🏼🤩❤️
(तस्वीर 18 जनवरी को बुकफेयर के अंतिम दिन की है और newspaper कवरेज अगले दिन 19 जनवरी की है..🦋)
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Delhi world bookfair
दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में एक सुखद संयोग।
@kavichiragjain सर से दूसरी बार मुलाक़ात हुई और थोड़ी बातचीत का अवसर मिला।
साथ ही पहली बार @poetessmanisha मैम से भी मिलना हुआ।
कभी-कभी छोटी-सी मुलाक़ातें भी अपनी सादगी में याद रह जाती हैं।
यह मुलाक़ात भी उन्हीं में से एक रही।🙏🏼🌻
(तस्वीर 18 जनवरी को बुकफेयर के अंतिम दिन की है..🦋)
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Delhi world bookfair
दिल्ली विश्व पुस्तक मेले की एक ख़ास याद।
अपनी किताब @nilotpal_mrinal सर को भेंट करने और उनसे संवाद का अवसर मिला।
इस सार्थक मुलाक़ात के लिए आभार।📚🙏🏼
(तस्वीर 18 जनवरी को बुकफेयर के अंतिम दिन की है..🌻)
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Delhi world bookfair
दिल्ली विश्व पुस्तक मेले @hind.yugm की स्टाल से एक बहुमूल्य झलकी।
अपनी किताब @authordivyaprakash भैया को भेंट करने और उनसे मिलने का अवसर मिला।
एक विनम्र और संवेदनशील व्यक्तित्व से मिलकर अपने भीतर भी गहरा असर महसूस होता है।
इस सुंदर मुलाक़ात के लिए धन्यवाद।🤩🌻❤️
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Delhi world bookfair
बस यूंही एक खयाल आया
जिसे लिखा गया
फिर पढ़ा गया..
शायद जैसा पढ़ा जाना चाहिए था
उतना ठीक ढंग से पढ़ा नहीं गया,
पर फिलहाल यही है।
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प्यारी आवाज़ में गाया है- @akankssha.groverr 🌻
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@ayushmannk
यदि मैं आती हुई तुम्हें
दिख ही जाऊं खिड़की से,
तो चाहूंगी कि फिर दरवाज़ा
तुम्हीं खोलने आओ मेरे लिए।
🌻🦋
~ऐश्वर्या शर्मा 'आईना'
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(तस्वीरें नवंबर की हैं..🪻)
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