घेर चाँद को चाँदी जैसे, तारे निकले हैं,
आज इकट्ठे ही सारे के सारे निकले हैं!
नीला-नीला आसमान का
महल बनाया है,
हर तारा है कमरा, उसको
खूब सजाया है,
खुली-खुली-सी खिड़की है, गलियारे निकले हैं!
घेर चाँद को चाँदी जैसे, तारे निकले हैं।
जैसे परियाँ आ जाती हैं
कथा-कहानी में,
झाँक रहे तारे वैसे ही
नीचे पानी में,
कमल खिले हैं या जल से गुब्बारे निकले हैं!
घेर चाँद को चाँदी जैसे, तारे निकले हैं।
नीचे से ऊपर तक सारा
चाँदी सोना है,
धुला-धुला-सा उनसे ही सब
कोना-कोना है,
कहीं-कहीं कुछ बादल भी कजरारे निकले हैं,
घेर चाँद को चाँदी जैसे तारे निकले हैं!
पुराने घर का दरवाज़ा
वो लकड़ी का पुराना दरवाज़ा,
आज भी अपनी कहानी सुनाता है।
जिसकी कुंडी में ज़ंग लग गया है,
पर यादों को ताज़ा कर जाता है।
दादी माँ की आहट, दादा जी की छड़ी,
यादों की गली में आज भी है खड़ी।
कई बार मेहमानों का स्वागत किया,
कई बार विदा की बेला में आँसू पिया।
धूप-छाँव में सहता रहा,
तूफ़ानों में भी अडिग खड़ा रहा।
वो दरवाज़ा जो घर का रक्षक था,
अब एक ख़ामोश यादों का साक्षी था।
वो पुराना घर, वो पुराना दरवाज़ा,
अक्सर मुझे बचपन की याद दिलाता है।
वहाँ की खामोशी में एक सुकून है,
जो शहर के शोर में कहीं खो जाता है।
नवे क्षितीज नवी पहाट, फुलावी आयुष्यात स्वप्नांची पहाट! स्मितहास्य तुझ्या चेहऱ्यावर राहो, तुझ्या पाठीशी हजारो सूर्याचे तेज तळपत राहो. वाढदिवसाच्या खूप शुभेच्छा बाळा!" #avyann