Aman Tiwari

@dumpitinprose

बड़े लोगों से मिलने मे हमेशा फ़ासला रखना जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता पोएटिक डंपयार्ड: @amnnti
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मै सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी वो झूट बोलेगा और ला- जवाब कर देगा- परवीन शाकिर
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2 months ago
अब के हम बिछड़ े तो शायद कभी ख़्वाबो ं में मिले ं जिस तरह सूख े हुए फूल किताबो ं में मिले ं अहमद फ़राज़
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2 months ago
कभी तो किया होगा मैंने भी अच्छा किसी के साथ, कभी तो चल दिया होगा किसी के साथ। ​कभी तो समेटा होगा बिखरे ख़्वाबों को पलकों पर, कभी तो ख़ुद को ढूँढा होगा किसी अजनबी के साथ। ​कभी तो दिखाई होगी मैंने किसी को राह सच्ची, कभी किसी का प्यार मिला दिया होगा उसी के साथ। ​कभी तो ख़ुद का दिल भी तुड़वा लिया होगा हँसकर, कभी तो टूटा दिल लेकर भटका होगा किसी के साथ। ​कभी तो जलाए होंगे तूफ़ानों में उनके लिए चराग़, कभी ख़ुद का अंधेरा भी बाँट लिया होगा ख़ुद ही के साथ। ​कभी तो छोड़ी होगी नींद सुकून की किसी के लिए, कभी तो किसी के ख़्वाबों में जागा होगा ख़ुशी के साथ। ​कभी तो आँखों में घूमा होगा लहू लेकर दर-दर, कभी तो यूँ ही टाल दिए होंगे ताने हँसी के साथ। ​कभी तो किसी की आँख का नूर बनकर देखा होगा, कभी तो नहीं मिला होगा हारे में भी किसी का साथ।
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13 hours ago
और कितनी ही बार सिर्फ़ अपने सब्र से दुखती कमर में चढ़ते बुख़ार में बाहर के तूफ़ान में भीतर की बाढ़ में उन्होंने खाना बनाया फिर वात्सल्य में भरकर उन्होंने उमगकर खाना बनाया -कुमार अम्बुज
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13 days ago
तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो किस किस को बताओगे कि घर क्यूँ नहीं जात -अमीर कजलबाश
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1 month ago
फिर बरसों के मोह को एक ज़हर की तरह पीकर उसने काँपते हाथों से मेरा हाथ पकड़ा। चल! क्षणों के सिर पर एक छत डालें। वह देख! परे – सामने उधर सच और झूठ के बीच कुछ ख़ाली जगह है। - अमृता प्रीतम
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1 month ago
हर बार कुछ लिखने की चाहत मे मैं अपने घर की छत पर आता हूं। #poetrycommunity #hindikavi #kavitayein
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1 month ago
कुछ भी नहीं होता पार नदी में धँसे बिना न पुल पार होता है न नदी पार होती है- नरेश सक्सेना
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1 month ago
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम- साहिर लुधियानवी
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1 month ago
उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और, ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे- गुलज़ार
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1 month ago
वो तो बता रहा था कई रोज़ का सफ़र जंजीर खींच कर जो मुसाफ़िर उतर गया- होश नोमानी
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1 month ago
मैं चुप कराता हूं हर शब उमड़ती बारिश को मगर ये रोज गयी बात छेड देती है -गुलज़ार
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2 months ago